Famous Temple In Chhattisgarh
Famous Temple In Chhattisgarh – छत्तीसगढ़ का नाम लेते ही जंगल, झरने और अनोखी जनजातीय संस्कृति दिमाग में आ जाते हैं। लेकिन यहाँ की असली पहचान सिर्फ प्रकृति से नहीं, बल्कि हजारों साल पुराने मंदिरों से भी जुड़ी है। इस राज्य में ऐसे कई मंदिर हैं, जिनका इतिहास बहुत पुराना है और जिनकी वजह से छत्तीसगढ़ आस्था और संस्कृति की शानदार झलक दिखाता है। यहाँ की धार्मिक जगहें स्थानीय परंपराओं और मान्यताओं से गहरा रिश्ता रखती हैं — मंदिरों की खूबसूरती, उनका इतिहास और आसपास की संस्कृति बस देखे बिना समझ में नहीं आता.

छत्तीसगढ़ के मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ की जगह नहीं, ये राज्य की वास्तुकला, मूर्तिकला, लोक संस्कृति और इतिहास की तस्वीर भी हैं। यहां के भोरमदेव मंदिर की प्राचीन बनावट हो, सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी, राजिम का राजीव लोचन या डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी—हर एक मंदिर की अपनी अलग ही छाप और कहानियां हैं।
आइए, जानते हैं छत्तीसगढ़ के सबसे खास मंदिरों के बारे में, थोड़ा करीबी अंदाज में।
छत्तीसगढ़ के मंदिरों का महत्व
यहां मंदिरों की परंपरा कई सौ साल पुरानी है। कई मंदिर तो राजाओं के जमाने से चले आ रहे हैं। दीवारों और स्तंभों पर की गई बारीक नक्काशी, देवी-देवताओं की मूर्तियां और अपनी अलग स्थापत्य शैली आपको हर जगह दिख ही जाएगी।
इन मंदिरों की अहमियत हैं—
- धार्मिक आस्था
- ऐतिहासिक विरासत
- प्राचीन वास्तुकला
- स्थानीय संस्कृति और रीति-रिवाज
यही वजह है कि यहां न केवल श्रद्धालु आते हैं, बल्कि इतिहास और कला के दीवाने भी खूब घूमने आते हैं।
1. भोरमदेव मंदिर, कबीरधाम
अगर छत्तीसगढ़ के पुराने-पिटे मंदिरों की बात होगी, तो सबसे पहले भोरमदेव का नाम जरूर आएगा। ये मंदिर कबीरधाम जिले के कवर्धा के पास, भगवान शिव को समर्पित है।

भोरमदेव मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” भी कहते हैं, और वाजिब है; इसकी नक्काशी और कलाकारी अद्भुत है। यह करीब एक हजार साल पुराना बताया जाता है और इसे 7वीं से 11वीं शताब्दी के बीच बनाया गया था।
मंदिर की खास बातें
- भगवान शिव का मंदिर
- दीवारों और स्तंभों पर बारीक नक्काशी
- शानदार मूर्तिकला
- चारों ओर पहाड़ और हरियाली
- वास्तुकला का बेहतरीन नमूना
इसके आसपास घूमने निकलेंगे, तो पहाड़, जंगल और झीलें सब मिल जाएंगी—यानि पूजा के साथ-साथ प्रकृति की खूबसूरती भी साथ।
2. मां दंतेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा
यह मंदिर छत्तीसगढ़ के सबसे प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। यहां देवी दंतेश्वरी की पूजा होती है और ये मंदिर शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम के पास बसा है। बस्तर इलाके में देवी की परंपरा गहरे जड़ें जमाए हुए है।

इमारत देखने में दक्षिण भारतीय शैली की लगेगी। माना जाता है कि इसका मौजूदा रूप 14वीं शताब्दी में नए सिरे से खड़ा किया गया था।
मुख्य बातें
- देवी दंतेश्वरी की पूजा का केंद्र
- पुराने पत्थरों की स्थापत्य कला
- शंखिनी-डंकिनी नदियों का संगम वाला स्थान
- बस्तर की संस्कृति से गहरा जुड़ाव
नवरात्रि और बस्तर दशहरे के समय मंदिर रंग-बिरंगे त्योहारों से जगमगा उठता है। चैत्र, शारदीय नवरात्रि और फागुन मेले में भीड़ उमड़ पड़ती है।
3. मां बम्लेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़
छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित धार्मिक स्थलों में डोंगरगढ़ का मां बम्लेश्वरी मंदिर जरूर है। राजनांदगांव जिले में करीब 1,600 फीट ऊंची पहाड़ी पर ये मंदिर विराजमान है।

ऊपर वाला बड़ा बम्लेश्वरी कहलाता है, नीचे मंदिर छोटा बम्लेश्वरी। यहां की त्रिवेणी कई लोगों की आस्था से जुड़ती है।
खास बातें
- पहाड़ी पर स्थित मंदिर
- देवी बम्लेश्वरी की आराधना
- चारों ओर खूबसूरत दृश्य
- नवरात्रि में अद्भुत उत्सव
- श्रद्धालुओं का मेला
मंदिर तक सीढ़ियों या पहाड़ी रास्ते से जाना पड़ता है। ऊपर पहुँचकर नजारे जबरदस्त दिखते हैं। नवरात्रि पर यहां का माहौल कुछ और ही रहता है, आस्था अपने चरम पर होती है।
4. राजीव लोचन मंदिर, राजिम
राजिम छत्तीसगढ़ के सबसे पुराने तीर्थों में शामिल है। यहां के राजीव लोचन मंदिर की एक अलग ही प्रतिष्ठा है। ये भगवान विष्णु को समर्पित है और महानदी व उसकी सहायक नदियों के संगम पर बसा है।

राजीव लोचन मंदिर अपनी बनावट, नक्काशी और ज़्यादा पुरानी होने के लिए पहचाना जाता है। नदी के घाट किनारे टहलना और मंदिर देखना लोगों को पसंद है।
खासतौर पर
- भगवान विष्णु की पूजा
- प्राचीन मंदिर स्थापत्य की मिसाल
- नदी के संगम पर स्थित
- तीर्थ और सांस्कृतिक केंद्र
5. सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर
महासमुंद जिले का सिरपुर – ये नाम सुनते ही उसके प्राचीन लक्ष्मण मंदिर की याद आ जाती है। यह विष्णु मंदिर ईंटों से सजा हुआ है और, सच कहें, तो ऐसी ईंट वास्तुकला कम ही देखने को मिलती है।

सिरपुर में कई पूराने धरोहर स्थल बिखरे पड़े हैं। अगर आपको पुरातत्त्व, मूर्तियों और इतिहास में थोड़ी भी रुचि है, तो यहां जरूर जाना चाहिए।
मंदिर की खासियत
- पूरी ईंटों से बनी भव्य इमारत
- हर कोने में कलात्मक सजावट
- प्राचीन हिंदू स्थापत्य का शानदार नमूना
6. महामाया मंदिर, रतनपुर
बिलासपुर जिले के रतनपुर का महामाया मंदिर छत्तीसगढ़ के मशहूर शक्ति स्थलों में है। देवी महामाया को समर्पित यह मंदिर कलचुरी राजाओं के जमाने से जुड़ा है।

नवरात्रों में यहां की रौनक देखते ही बनती है, श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है।
7. और भी कई मंदिर
छत्तीसगढ़ में हर इलाके में देवी-देवताओं के छोटे-बड़े, कई अनगिनत मंदिर बिखरे हैं। इनमें से कई नदी किनारे, पहाड़ियों पर या झरनों-वनों के आस-पास बसे हैं। मतलब यहां यात्रा करने पर सिर्फ मंदिर ही नहीं, नेचर भी साथ मिल जाएगा।
छत्तीसगढ़ के प्रमुख मंदिरों की सूची
- भोरमदेव मंदिर, कबीरधाम
- मां दंतेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा
- मां बम्लेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़
- राजीव लोचन मंदिर, राजिम
- लक्ष्मण मंदिर, सिरपुर
- महामाया मंदिर, रतनपुर
- शिवरीनारायण मंदिर, जांजगीर-चांपा
- नागेश्वरनाथ मंदिर, रायपुर
हर एक का अपना रंग और कहानी है, बस सुनने और महसूस करने की जरूरत है।
शिवरीनारायण और चंपारण्य
शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा) छत्तीसगढ़ की धार्मिक परंपराओं का अहम केंद्र है, राम वन गमन पथ से भी जुड़ा माना गया है। चंपारण्य संत वल्लभाचार्य की जन्मभूमि है और वहां वल्लभ संप्रदाय के मठ व मंदिर देखने मिलते हैं।
छत्तीसगढ़ के मंदिरों की स्थापत्य और कलात्मक खूबियां
- पत्थर पर गहरी नक्काशी
- ईंटों से बने प्राचीन मंदिर (जैसे लक्ष्मण मंदिर)
- ऊँचे शिखर
- सुंदर मूर्तियां और चित्र
- प्राकृतिक सुंदरता – पहाड़, नदी, घाट
त्योहार और मंदिर
- नवरात्रि – यहां के देवी मंदिरों का सबसे बड़ा उत्सव
- महाशिवरात्रि – शिवमंदिरों की खास रात
- रामनवमी, जन्माष्टमी – विष्णु-राम मंदिरों में उत्सव
- बस्तर दशहरा – दंतेश्वरी के नाम, बस्तर की अपनी ही परंपरा
मंदिर यात्रा में क्या ध्यान रखें?
- मंदिर के नियमों का पालन करें, जैसा कि लिखा या बताया गया हो
- स्वच्छता रखें, कचरा ना फैलाएं
- स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करें, खासकर जनजातीय बहुल क्षेत्रों में
- भीड़ के वक्त सतर्क रहें
- मौसम के हिसाब से तैयारी कर लें, खासकर पहाड़ी मंदिरों के लिए
मंदिर घूमने का बढ़िया समय
अक्टूबर से फरवरी मौसम के लिहाज से अच्छा़ रहता है। नवरात्रि, दशहरा जैसे मौकों पर मंदिरों में अलग ही रंग होता है, लेकिन भीड़ बहुत होती है। शांत यात्रा के लिए त्योहारों के अलावा आम दिनों में जाएं।
परिवार के साथ मंदिर यात्रा
यह भारत के उन इलाकों में से है, जहां परिवार के साथ घूमना न सिर्फ सुरक्षित, बल्कि बच्चों के लिए भी रोचक है। बच्चे मंदिरों के साथ-साथ पुराना इतिहास, स्थापत्य और संस्कृति सीख सकते हैं।
धार्मिक पर्यटन के अलावा पास-पड़ोस में घूमने को ढेरों प्राकृतिक स्थल-पिकनिक स्पॉट भी मिल जाते हैं।
छत्तीसगढ़ के मंदिरों की पहचान क्यों खास है?
- सदियों पुराना धार्मिक केंद्र
- अलग-अलग राजवंशों की छाप
- स्थापत्य और नक्काशी के नायाब उदाहरण
- पहाड़, जंगल और नदी के बीच बसे मंदिर
- धार्मिक मेले और त्योहार – संस्कृति की झलक
पहली बार छत्तीसगढ़ के मंदिर घूमने निकल रहे हैं? टिप्स ये रहे—
- ज्यादा मंदिरों की भागदौड़ न करें, एक क्षेत्र चुनें
- बस्तर क्षेत्र – दंतेश्वरी मंदिर और सरगुजा के आस-पास घूमिए
- कवर्धा – भोरमदेव मंदिर घूमिए, पास के गांव का भ्रमण कर सकते हैं
- डोंगरगढ़ – बम्लेश्वरी के साथ आसपास के गांव या पहाड़ियों में घूमना अच्छा लगेगा
- राजीम, रतनपुर – नदी, तीर्थ और पुराना बाजार भी देखिए
यानी यात्रा आराम से और तसल्ली से करें, तभी मजा है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ के प्रमुख मंदिरों में भक्ति ही नहीं, इतिहास, स्थापत्य, संस्कृति और प्रकृति, सबकी झलक मिलती है। हर मंदिर की अपनी कहानी है—भोरमदेव की स्थापत्य की बारीकी, दंतेवाड़ा की शक्तिपीठ, डोंगरगढ़ की पहाड़ों की चढ़ाई, राजिम की धार्मिकता या सिरपुर की ईंट-शिल्प।
अगर आप आस्था के साथ भारतीय विरासत और लोकसंस्कृति को भी करीब से जानना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ बेझिझक अपनी सूची में जोड़ें। यहां की मंदिर यात्रा हर मायने में यादगार बनती है—दर्शन के साथ-साथ आपको देवस्थलों की प्राचीन कहानी, मेलों-त्योहारों और लोगों से रूबरू होने का मौका देती है।
अगली बार जब छत्तीसगढ़ जाएं, तो इन मंदिरों को जरूर घूमिए, और महसूस कीजिए छत्तीसगढ़ की असली धड़कन।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: छत्तीसगढ़ का सबसे प्रसिद्ध मंदिर कौन सा है?
मां दंतेश्वरी मंदिर, मां बम्लेश्वरी मंदिर, भोरमदेव मंदिर, राजीव लोचन और महामाया मंदिर – ये सब बहुत प्रसिद्ध हैं।
प्रश्न 2: भोरमदेव मंदिर किस भगवान को समर्पित है?
भगवान शिव को, और इसकी नक्काशी के लिए पूरे भारत में पहचाना जाता है।
प्रश्न 3: मां बम्लेश्वरी मंदिर कहां है?
डोंगरगढ़, राजनांदगांव जिले में—महीन सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।
प्रश्न 4: मां दंतेश्वरी मंदिर कहां स्थित है?
दंतेवाड़ा में, बस्तर क्षेत्र का मुख्य शक्ति केंद्र।
प्रश्न 5: राजीव लोचन मंदिर किस भगवान को समर्पित है?
भगवान विष्णु को, और राजिम का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है।
प्रश्न 6: सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
क्योंकि ये प्राचीन ईंट मंदिरों का बेहतरीन उदाहरण है और इतिहास प्रेमियों के लिए किसी खजाने से कम नहीं।
प्रश्न 7: छत्तीसगढ़ में मंदिर घूमने का अच्छा समय कौन सा है?
अक्टूबर से फरवरी। अगर त्योहारों का रंग देखना है तो नवरात्रि में जरूर जाएं, वरना बाकी वक्त भी खुशनुमा और सुविधाजनक है।
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