छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मंदिर (Famous Temple In Chhattisgarh): आस्था, इतिहास और संस्कृति की अद्भुत झलक
परिचय
Famous Temple In Chhattisgarh – छत्तीसगढ़ को अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, झरनों और जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता है। इसके साथ ही यह राज्य प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों की दृष्टि से भी बहुत समृद्ध है। यहां कई ऐसे मंदिर हैं जिनका संबंध सदियों पुराने इतिहास, स्थानीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं से है।

छत्तीसगढ़ के मंदिर केवल पूजा-पाठ के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे राज्य की वास्तुकला, मूर्तिकला, लोक संस्कृति और इतिहास को समझने का माध्यम भी हैं। बोरमदेव मंदिर की प्राचीन स्थापत्य कला, सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर, दंतेवाड़ा का मां दंतेश्वरी मंदिर, राजिम का राजीव लोचन मंदिर और डोंगरगढ़ का मां बम्लेश्वरी मंदिर राज्य के प्रमुख धार्मिक आकर्षणों में शामिल हैं।
इस लेख में हम छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
1. छत्तीसगढ़ के मंदिरों का महत्व
छत्तीसगढ़ में मंदिरों की परंपरा बहुत पुरानी है। यहां के कई मंदिर प्राचीन राजवंशों के समय बनाए गए थे। इन मंदिरों में पत्थरों पर की गई नक्काशी, देवी-देवताओं की मूर्तियां और पारंपरिक स्थापत्य शैली देखने को मिलती है।
इन मंदिरों का महत्व मुख्य रूप से चार कारणों से है—
- धार्मिक आस्था
- ऐतिहासिक विरासत
- प्राचीन वास्तुकला
- स्थानीय संस्कृति और परंपराएं
यही कारण है कि छत्तीसगढ़ के मंदिरों में श्रद्धालुओं के साथ-साथ इतिहास और वास्तुकला में रुचि रखने वाले पर्यटक भी पहुंचते हैं।
2. भोरमदेव मंदिर, कबीरधाम
छत्तीसगढ़ के सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिरों में भोरमदेव मंदिर का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। यह मंदिर कबीरधाम जिले में कवर्धा के पास स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है।

भोरमदेव मंदिर को कई बार इसकी स्थापत्य कला के कारण “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है। सरकारी पर्यटन जानकारी के अनुसार यह मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है और इसकी निर्माण परंपरा 7वीं से 11वीं शताब्दी के बीच से जोड़ी जाती है।
भोरमदेव मंदिर की विशेषताएं
- भगवान शिव को समर्पित मंदिर
- प्राचीन पत्थर की नक्काशी
- सुंदर मूर्तिकला
- पर्वतीय और प्राकृतिक वातावरण
- ऐतिहासिक वास्तुकला
मंदिर की दीवारों और स्तंभों पर दिखाई देने वाली कलात्मक नक्काशी इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है।
पर्यटकों के लिए आकर्षण
भोरमदेव के आसपास पहाड़ और हरियाली दिखाई देती है। इसलिए धार्मिक यात्रा के साथ-साथ यहां प्राकृतिक वातावरण का आनंद भी लिया जा सकता है।
3. मां दंतेश्वरी मंदिर, दंतेवाड़ा
छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण शक्तिपीठ परंपरा से जुड़े मंदिरों में मां दंतेश्वरी मंदिर का विशेष स्थान है। यह दंतेवाड़ा में स्थित है और देवी दंतेश्वरी को समर्पित है।

सरकारी पर्यटन स्रोतों के अनुसार यह मंदिर शंखिनी और डंकिनी नदियों के संगम के पास स्थित है और बस्तर की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण केंद्र है।
मंदिर का वर्तमान स्वरूप मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय स्थापत्य प्रभाव दिखाता है। छत्तीसगढ़ संस्कृति विभाग के अनुसार मंदिर की मूल परंपरा पुरानी है और 14वीं शताब्दी में इसके पुनर्निर्माण/जीर्णोद्धार का उल्लेख मिलता है।
मां दंतेश्वरी मंदिर की विशेषताएं
- देवी दंतेश्वरी की आराधना
- प्राचीन धार्मिक परंपरा
- पत्थर की स्थापत्य कला
- शंखिनी और डंकिनी नदियों का संगम
- बस्तर की संस्कृति से गहरा संबंध
प्रमुख उत्सव
नवरात्रि और बस्तर दशहरा के समय यहां विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां होती हैं। सरकारी पर्यटन जानकारी के अनुसार मंदिर में चैत्र नवरात्रि, शारदीय नवरात्रि और फागुन मेले के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
4. मां बम्लेश्वरी मंदिर, डोंगरगढ़
डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर छत्तीसगढ़ के सबसे लोकप्रिय धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर राजनांदगांव जिले में लगभग 1,600 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है।

पहाड़ी पर स्थित मुख्य मंदिर को आम तौर पर बड़ी बम्लेश्वरी कहा जाता है, जबकि नीचे स्थित मंदिर को छोटी बम्लेश्वरी के नाम से जाना जाता है।
मंदिर की विशेषताएं
- पहाड़ी की चोटी पर स्थित मंदिर
- देवी बम्लेश्वरी की आराधना
- आसपास सुंदर प्राकृतिक दृश्य
- नवरात्रि में विशेष धार्मिक आयोजन
- बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन
मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सीढ़ियों और पहाड़ी मार्ग से जाना पड़ता है। ऊपर पहुंचने पर आसपास के क्षेत्र का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।
नवरात्रि का महत्व
चैत्र और शारदीय नवरात्रि के समय डोंगरगढ़ में विशेष धार्मिक वातावरण रहता है। इन अवसरों पर श्रद्धालु देवी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
5. राजीव लोचन मंदिर, राजिम
राजिम को छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक नगरों में गिना जाता है। यहां स्थित राजीव लोचन मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित एक महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिर है।

यह मंदिर महानदी और उसकी सहायक नदियों के संगम क्षेत्र में स्थित है। सरकारी जानकारी के अनुसार राजीव लोचन मंदिर राजिम में नदी तट पर स्थित है और रायपुर से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।
राजीव लोचन मंदिर की विशेषताएं
- भगवान विष्णु को समर्पित
- प्राचीन स्थापत्य कला
- नदी संगम के निकट स्थित
- धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व
- राजिम क्षेत्र का प्रमुख तीर्थ
राजिम को अक्सर छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में शामिल किया जाता है। यहां धार्मिक यात्रा के साथ आसपास के प्राचीन स्थलों को भी देखा जा सकता है।
6. सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर
महासमुंद जिले का सिरपुर छत्तीसगढ़ के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और पुरातात्विक क्षेत्रों में से एक है। यहां स्थित लक्ष्मण मंदिर अपनी प्राचीन ईंटों की स्थापत्य कला के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। सिरपुर में कई प्राचीन धार्मिक और पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।
लक्ष्मण मंदिर की खासियत
इस मंदिर की सबसे खास बात इसकी ईंटों से निर्मित वास्तुकला और सुंदर सजावटी कार्य है। मंदिर की संरचना प्राचीन भारतीय मंदिर स्थापत्य की उत्कृष्ट परंपरा का उदाहरण मानी जाती है।
सिरपुर क्यों जाएं?
- प्राचीन मंदिर देखने के लिए
- पुरातात्विक इतिहास समझने के लिए
- प्राचीन मूर्तिकला देखने के लिए
- छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक विरासत जानने के लिए
सिरपुर धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ इतिहास प्रेमियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण स्थान है।
7. महामाया मंदिर, रतनपुर
बिलासपुर जिले का रतनपुर प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाला क्षेत्र है। यहां स्थित महामाया मंदिर देवी महामाया को समर्पित एक प्रसिद्ध शक्तिस्थल है।

नीति आयोग की 2026 की पर्यटन सामग्री में भी रतनपुर के महामाया मंदिर को प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल किया गया है और इसे कलचुरी कालीन परंपरा से जोड़ा गया है।
मंदिर की विशेषताएं
- देवी महामाया की आराधना
- प्राचीन धार्मिक परंपरा
- रतनपुर का ऐतिहासिक महत्व
- नवरात्रि में विशेष आयोजन
- बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन
नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा और धार्मिक आयोजन होते हैं।
8. चंद्रचूड़ मंदिर और अन्य प्राचीन मंदिर
छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में भगवान शिव, विष्णु, देवी और अन्य देवी-देवताओं को समर्पित अनेक छोटे-बड़े मंदिर मौजूद हैं।
इन मंदिरों की खासियत यह है कि इनमें स्थानीय संस्कृति और प्राचीन स्थापत्य शैली का मिश्रण देखने को मिलता है। कई मंदिर नदी, पहाड़ी या जंगलों के आसपास स्थित हैं, जिससे धार्मिक यात्रा के साथ प्राकृतिक वातावरण का अनुभव भी मिलता है।
9. छत्तीसगढ़ के प्रमुख प्रसिद्ध मंदिरों की सूची
छत्तीसगढ़ में घूमने और धार्मिक पर्यटन के लिए कई मंदिर प्रसिद्ध हैं। इनमें प्रमुख नाम हैं—
- भोरमदेव मंदिर – कवर्धा
- मां दंतेश्वरी मंदिर – दंतेवाड़ा
- मां बम्लेश्वरी मंदिर – डोंगरगढ़
- राजीव लोचन मंदिर – राजिम
- लक्ष्मण मंदिर – सिरपुर
- महामाया मंदिर – रतनपुर
- शिवरीनारायण मंदिर – जांजगीर-चांपा
- भोरमदेव परिसर के अन्य मंदिर – कबीरधाम
- चंपारण्य के धार्मिक स्थल
- नागेश्वरनाथ मंदिर – रायपुर क्षेत्र
इनमें से प्रत्येक स्थान की अपनी अलग धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान है।
10. शिवरीनारायण का धार्मिक महत्व
जांजगीर-चांपा क्षेत्र में स्थित शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ की धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसे भगवान राम से जुड़ी स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और राम वन गमन परंपरा से भी जोड़ा जाता है।
नीति आयोग की 2026 की सामग्री में शिवरीनारायण को राम वन गमन पथ से जुड़े महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में शामिल किया गया है।
यहां मंदिरों के साथ-साथ नदी और आसपास का प्राकृतिक वातावरण भी यात्रियों को आकर्षित करता है।
11. चंपारण्य के धार्मिक स्थल
रायपुर क्षेत्र के पास स्थित चंपारण्य धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। इसे संत वल्लभाचार्य की जन्मस्थली के रूप में जाना जाता है।
यहां वल्लभ संप्रदाय से जुड़े मंदिर और धार्मिक स्थल मौजूद हैं। इसलिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु यहां आते हैं।
12. मंदिरों की वास्तुकला की विशेषताएं
छत्तीसगढ़ के प्राचीन मंदिरों में अलग-अलग स्थापत्य शैलियों की झलक देखने को मिलती है।
प्रमुख विशेषताएं
1. पत्थर की नक्काशी:
कई मंदिरों की दीवारों और स्तंभों पर सुंदर नक्काशी दिखाई देती है।
2. ईंटों का प्रयोग:
सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर प्राचीन ईंट निर्माण की उत्कृष्ट परंपरा का उदाहरण है।
3. शिखर:
कई मंदिरों में ऊंचे और कलात्मक शिखर देखने को मिलते हैं।
4. मूर्तिकला:
देवी-देवताओं, धार्मिक कथाओं और विभिन्न कलात्मक आकृतियों की मूर्तियां मंदिरों को विशेष बनाती हैं।
5. प्राकृतिक वातावरण:
कई मंदिर पहाड़ियों, नदियों और जंगलों के आसपास स्थित हैं।
13. छत्तीसगढ़ के मंदिरों में मनाए जाने वाले प्रमुख त्योहार
छत्तीसगढ़ के मंदिरों में पूरे वर्ष विभिन्न धार्मिक पर्व मनाए जाते हैं।
नवरात्रि
नवरात्रि देवी मंदिरों के लिए सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी और दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी जैसे मंदिरों में इस समय विशेष धार्मिक वातावरण देखने को मिलता है।
महाशिवरात्रि
भगवान शिव को समर्पित मंदिरों में महाशिवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
रामनवमी
भगवान राम से जुड़े धार्मिक स्थलों में रामनवमी का विशेष महत्व है।
जन्माष्टमी
भगवान कृष्ण और विष्णु से जुड़े मंदिरों में जन्माष्टमी के अवसर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
बस्तर दशहरा
बस्तर क्षेत्र का दशहरा अपनी अनूठी स्थानीय परंपराओं के कारण प्रसिद्ध है। दंतेश्वरी देवी की परंपरा इस उत्सव के धार्मिक और सांस्कृतिक पक्ष से गहराई से जुड़ी हुई है।
14. मंदिर यात्रा के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?
छत्तीसगढ़ के मंदिरों की यात्रा करते समय कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. मंदिर के नियमों का पालन करें
हर मंदिर की अपनी पूजा और प्रवेश संबंधी परंपराएं हो सकती हैं। वहां के नियमों का सम्मान करें।
2. साफ-सफाई रखें
मंदिर परिसर में कूड़ा न फैलाएं और आसपास के प्राकृतिक वातावरण को नुकसान न पहुंचाएं।
3. स्थानीय संस्कृति का सम्मान करें
छत्तीसगढ़ में अनेक जनजातीय और स्थानीय परंपराएं हैं। यात्रा के दौरान स्थानीय संस्कृति और रीति-रिवाजों का सम्मान करना जरूरी है।
4. भीड़ के समय सावधानी रखें
नवरात्रि और बड़े धार्मिक मेलों में भीड़ अधिक हो सकती है। ऐसे समय में अपने साथ आने वाले लोगों के साथ रहें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
5. मौसम का ध्यान रखें
गर्मी, बारिश और सर्दी के अनुसार यात्रा की तैयारी करें। पहाड़ी मंदिरों में जाने से पहले स्थानीय मौसम और रास्ते की स्थिति की जानकारी लेना उपयोगी रहता है।
15. छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मंदिरों की यात्रा का सबसे अच्छा समय
मंदिरों की यात्रा पूरे वर्ष की जा सकती है, लेकिन मौसम के अनुसार अनुभव अलग हो सकता है।
सामान्य रूप से अक्टूबर से फरवरी के बीच मौसम अपेक्षाकृत आरामदायक रहता है। वहीं नवरात्रि जैसे धार्मिक अवसरों पर मंदिरों में विशेष उत्सव देखने को मिलते हैं।
यदि आपका उद्देश्य शांत वातावरण में घूमना है, तो बड़े त्योहारों के अलावा सामान्य दिनों में यात्रा करना अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
16. परिवार के साथ मंदिर यात्रा
छत्तीसगढ़ के कई धार्मिक स्थल परिवार के साथ घूमने के लिए अच्छे विकल्प हो सकते हैं। धार्मिक दर्शन के अलावा बच्चों और परिवार के अन्य सदस्यों को यहां राज्य के इतिहास, वास्तुकला और संस्कृति के बारे में जानने का अवसर मिलता है।
बोरमदेव, सिरपुर, राजिम और रतनपुर जैसे स्थानों में धार्मिक स्थलों के साथ ऐतिहासिक महत्व भी जुड़ा हुआ है।
17. छत्तीसगढ़ के मंदिर और पर्यटन
छत्तीसगढ़ में धार्मिक पर्यटन को प्राकृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन के साथ जोड़ा जा सकता है।
उदाहरण के लिए, बस्तर की यात्रा के दौरान दंतेश्वरी मंदिर के साथ आसपास के प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों को देखा जा सकता है। इसी तरह बोरमदेव यात्रा के दौरान कवर्धा और आसपास के क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया जा सकता है।
भारत सरकार के पर्यटन पोर्टल के अनुसार छत्तीसगढ़ में दंतेश्वरी मंदिर और बोरमदेव मंदिर राज्य की प्रमुख आध्यात्मिक एवं विरासत संपदाओं में शामिल हैं।
18. छत्तीसगढ़ के मंदिर क्यों प्रसिद्ध हैं?
छत्तीसगढ़ के मंदिर कई कारणों से प्रसिद्ध हैं।
धार्मिक कारण:
यहां देवी-देवताओं से जुड़े अनेक प्राचीन धार्मिक स्थल हैं।
ऐतिहासिक कारण:
कई मंदिर सदियों पुरानी सभ्यताओं और राजवंशों की कहानी बताते हैं।
वास्तुकला:
प्राचीन मूर्तिकला और मंदिर निर्माण शैली इन्हें विशेष बनाती है।
प्राकृतिक सुंदरता:
कई मंदिर पहाड़, नदी और हरियाली के बीच स्थित हैं।
स्थानीय संस्कृति:
मंदिरों से जुड़े मेले और त्योहार स्थानीय संस्कृति की सुंदर झलक दिखाते हैं।
19. पहली बार छत्तीसगढ़ के मंदिर घूमने वालों के लिए सुझाव
अगर आप पहली बार छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मंदिरों की यात्रा कर रहे हैं, तो एक साथ बहुत अधिक स्थानों को कवर करने की कोशिश न करें।
पहले एक क्षेत्र चुनें।
बस्तर क्षेत्र
दंतेश्वरी मंदिर और आसपास के धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थल।
कवर्धा क्षेत्र
बोरमदेव मंदिर और आसपास के ऐतिहासिक स्थल।
राजिम क्षेत्र
राजीव लोचन मंदिर और नदी संगम क्षेत्र।
डोंगरगढ़ क्षेत्र
मां बम्लेश्वरी मंदिर और आसपास के धार्मिक स्थल।
बिलासपुर क्षेत्र
रतनपुर का महामाया मंदिर और आसपास के ऐतिहासिक स्थल।
इस तरह यात्रा अधिक आरामदायक और व्यवस्थित हो सकती है।
20. निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मंदिर राज्य की धार्मिक आस्था के साथ-साथ उसके इतिहास, संस्कृति, वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता को भी दर्शाते हैं। बोरमदेव मंदिर की प्राचीन स्थापत्य कला, दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी की धार्मिक परंपरा, डोंगरगढ़ की मां बम्लेश्वरी की पहाड़ी यात्रा, राजिम का राजीव लोचन मंदिर और सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर—हर स्थान की अपनी अलग पहचान है।
यदि आप धार्मिक पर्यटन के साथ इतिहास और संस्कृति को भी करीब से समझना चाहते हैं, तो छत्तीसगढ़ आपके लिए एक शानदार पर्यटन क्षेत्र हो सकता है।
यहां की मंदिर यात्रा केवल दर्शन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आपको प्राचीन भारतीय वास्तुकला, स्थानीय परंपराओं, मेलों, त्योहारों और प्राकृतिक वातावरण से भी परिचित कराती है।
इसलिए अगली बार जब आप छत्तीसगढ़ घूमने की योजना बनाएं, तो इन प्रसिद्ध मंदिरों को अपनी यात्रा सूची में जरूर शामिल करें और राज्य की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानें।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: छत्तीसगढ़ का सबसे प्रसिद्ध मंदिर कौन सा है?
छत्तीसगढ़ में कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। मां दंतेश्वरी मंदिर, मां बम्लेश्वरी मंदिर, भोरमदेव मंदिर, राजीव लोचन मंदिर और महामाया मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हैं।
प्रश्न 2: भोरमदेव मंदिर किस भगवान को समर्पित है?
भोरमदेव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और अपनी प्राचीन स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है।
प्रश्न 3: मां बम्लेश्वरी मंदिर कहां है?
मां बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़, राजनांदगांव जिले में स्थित है। मुख्य मंदिर लगभग 1,600 फीट ऊंची पहाड़ी पर है।
प्रश्न 4: मां दंतेश्वरी मंदिर कहां स्थित है?
मां दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा में स्थित है और बस्तर क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक केंद्र है।
प्रश्न 5: राजीव लोचन मंदिर किस भगवान को समर्पित है?
राजीव लोचन मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और राजिम के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।
प्रश्न 6: सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर क्यों प्रसिद्ध है?
सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर अपनी प्राचीन ईंटों की वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के कारण प्रसिद्ध है।
प्रश्न 7: छत्तीसगढ़ में मंदिर घूमने का अच्छा समय कौन सा है?
सामान्य पर्यटन के लिए अक्टूबर से फरवरी के बीच का समय सुविधाजनक हो सकता है। हालांकि धार्मिक उत्सवों का अनुभव लेने के लिए नवरात्रि जैसे अवसर विशेष महत्व रखते हैं।
Read More –