किडनी की बीमारी के लक्षण (kidney disease symptoms) : कारण, जांच, इलाज और बचाव की पूरी जानकारी
kidney disease symptoms- किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह खून को साफ करने, शरीर से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त पानी बाहर निकालने, रक्तचाप को नियंत्रित करने तथा शरीर में कुछ जरूरी खनिजों और हार्मोन का संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो शरीर में धीरे-धीरे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

किडनी की बीमारी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआती अवस्था में कई लोगों को कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी को पहचानना संभव नहीं होता और जरूरत पड़ने पर रक्त तथा मूत्र की जांच महत्वपूर्ण होती है।
नीचे किडनी की बीमारी को स्टेप-बाय-स्टेप आसान भाषा में समझाया गया है।
1. किडनी क्या है?
हमारे शरीर में सामान्यतः दो किडनी होती हैं। ये रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर, कमर के पीछे की तरफ स्थित होती हैं। प्रत्येक किडनी लगभग मुट्ठी के आकार की होती है।
किडनी का मुख्य काम शरीर में बनने वाले अपशिष्ट पदार्थों को खून से अलग करके मूत्र के माध्यम से बाहर निकालना है।
इसके अलावा किडनी:
- खून को फिल्टर करती है।
- अतिरिक्त पानी को बाहर निकालती है।
- शरीर में सोडियम, पोटैशियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।
- रक्तचाप को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है।
- लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करने वाले हार्मोन के उत्पादन में योगदान देती है।
- हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी विटामिन D के सक्रिय रूप से संबंधित प्रक्रियाओं में भूमिका निभाती है।
इसलिए किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर के कई हिस्सों पर प्रभाव पड़ सकता है।
2. किडनी की बीमारी क्या होती है?
जब किडनी खून को पर्याप्त रूप से फिल्टर नहीं कर पाती या उसके ऊतक और रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो इसे सामान्य रूप से किडनी की बीमारी कहा जाता है।

किडनी की समस्या अचानक भी हो सकती है और लंबे समय में धीरे-धीरे भी विकसित हो सकती है।
मुख्य रूप से दो स्थितियां समझना उपयोगी है:
(क) अचानक किडनी की समस्या
इसे Acute Kidney Injury (AKI) कहा जाता है। इसमें किडनी की कार्यक्षमता अचानक कम हो सकती है। गंभीर डिहाइड्रेशन, कुछ संक्रमण, बहुत कम रक्तचाप या कुछ दवाओं/अन्य चिकित्सकीय स्थितियों के कारण ऐसा हो सकता है।
(ख) लंबे समय की किडनी बीमारी
इसे Chronic Kidney Disease (CKD) कहा जाता है। इसमें किडनी की कार्यक्षमता लंबे समय तक धीरे-धीरे कम होती जाती है।
CKD की शुरुआत में अक्सर कोई खास लक्षण नहीं होते। इसी कारण जोखिम वाले लोगों में नियमित जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
3. किडनी की बीमारी के प्रमुख लक्षण
अब जानते हैं कि किडनी की बीमारी में कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
ध्यान रखें कि इनमें से कई लक्षण अन्य बीमारियों में भी हो सकते हैं। इसलिए किसी एक लक्षण का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति को निश्चित रूप से किडनी की बीमारी है।
1. बार-बार थकान होना
किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा हो सकते हैं। कुछ लोगों में इसके कारण कमजोरी, थकान या ऊर्जा की कमी महसूस हो सकती है।

हालांकि थकान के बहुत से अन्य कारण भी होते हैं, जैसे नींद की कमी, एनीमिया, तनाव या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं।
2. शरीर में सूजन
किडनी अतिरिक्त नमक और पानी को पर्याप्त रूप से बाहर नहीं निकाल पाए तो शरीर में तरल पदार्थ जमा हो सकता है।
इससे विशेष रूप से:
- पैरों में
- टखनों में
- पैरों के पंजों में
- हाथों में
- आंखों के आसपास
सूजन दिखाई दे सकती है।
3. पेशाब में बदलाव
किडनी की समस्या में पेशाब के पैटर्न या रूप में बदलाव हो सकता है।
उदाहरण के लिए:
- सामान्य से अधिक या कम पेशाब होना
- रात में बार-बार पेशाब आना
- पेशाब में झाग दिखाई देना
- पेशाब का रंग असामान्य होना
- पेशाब में खून आना
पेशाब में लगातार झाग प्रोटीन की मौजूदगी से संबंधित हो सकता है, लेकिन हर बार झागदार पेशाब का अर्थ किडनी की बीमारी नहीं होता।
4. पेशाब में खून
पेशाब में दिखाई देने वाला खून Hematuria कहलाता है।
इसके कई कारण हो सकते हैं, जिनमें मूत्र संक्रमण, पथरी और किडनी या मूत्र मार्ग से संबंधित अन्य समस्याएं शामिल हैं।
इसलिए पेशाब में खून दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
5. भूख कम लगना
किडनी की गंभीर बीमारी में शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने के कारण भूख कम लग सकती है।
कुछ लोगों को भोजन का स्वाद अलग लग सकता है या खाने के बाद असहजता महसूस हो सकती है।
6. मतली या उल्टी
किडनी की गंभीर कार्यक्षमता में कमी होने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थ बढ़ने से मतली और उल्टी जैसी समस्या हो सकती है।

लेकिन उल्टी के बहुत से दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए इसे अकेले किडनी रोग का संकेत नहीं माना जा सकता।
7. सांस फूलना
किडनी की गंभीर बीमारी में शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा होने पर कुछ लोगों को सांस लेने में परेशानी हो सकती है।
सांस फूलने के कई गंभीर कारण हो सकते हैं। यदि सांस लेने में अचानक या बहुत अधिक परेशानी हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
8. त्वचा में खुजली
उन्नत किडनी रोग में शरीर के रासायनिक और खनिज संतुलन में बदलाव के कारण खुजली हो सकती है।
9. मांसपेशियों में ऐंठन
किडनी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स और खनिजों के संतुलन को बनाए रखने में भूमिका निभाती है। किडनी की बीमारी में इस संतुलन में बदलाव आने पर कुछ लोगों को मांसपेशियों में ऐंठन या कमजोरी हो सकती है।
10. ध्यान केंद्रित करने में परेशानी
गंभीर किडनी रोग में कुछ लोगों को ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, अत्यधिक नींद या मानसिक स्पष्टता में कमी महसूस हो सकती है।
11. कमर या बगल में दर्द
कुछ किडनी और मूत्र मार्ग की समस्याओं में कमर या शरीर के बगल वाले हिस्से में दर्द हो सकता है।
लेकिन हर कमर दर्द का संबंध किडनी से नहीं होता। मांसपेशियों और रीढ़ की समस्याएं कमर दर्द के बहुत सामान्य कारण हैं।
4. शुरुआती किडनी बीमारी को पहचानना मुश्किल क्यों है?
यह किडनी की बीमारी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
Chronic Kidney Disease की शुरुआती अवस्था में व्यक्ति को कोई स्पष्ट लक्षण नहीं भी हो सकते हैं।
कई बार किडनी की कार्यक्षमता काफी कम होने के बाद लक्षण दिखाई देते हैं।
इसलिए यदि किसी व्यक्ति को:
- डायबिटीज है
- हाई ब्लड प्रेशर है
- हृदय रोग है
- परिवार में किडनी रोग का इतिहास है
- पहले किडनी की समस्या रही है
तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।
5. किडनी की बीमारी के प्रमुख कारण
किडनी खराब होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं।
5.1 डायबिटीज
लंबे समय तक ब्लड शुगर अधिक रहने से किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं और फिल्टरिंग सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है।
डायबिटीज किडनी की बीमारी का एक प्रमुख जोखिम कारक है।
5.2 हाई ब्लड प्रेशर
लंबे समय तक अनियंत्रित उच्च रक्तचाप किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है।
इसीलिए ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना किडनी के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
5.3 किडनी की पथरी
किडनी स्टोन मूत्र के रास्ते में रुकावट पैदा कर सकता है और कुछ परिस्थितियों में किडनी पर प्रभाव डाल सकता है।
5.4 संक्रमण
बार-बार होने वाले कुछ मूत्र मार्ग या किडनी संक्रमण, विशेष परिस्थितियों में, किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
5.5 कुछ दवाओं का अनुचित इस्तेमाल
कुछ दवाएं किडनी पर प्रभाव डाल सकती हैं, विशेषकर यदि उन्हें लंबे समय तक, अधिक मात्रा में या बिना चिकित्सकीय सलाह के लिया जाए।
इसलिए दर्द निवारक सहित दवाओं का नियमित या लंबे समय का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से करना बेहतर है।
5.6 वंशानुगत रोग
कुछ किडनी रोग परिवारों में चल सकते हैं। उदाहरण के लिए, Polycystic Kidney Disease एक आनुवंशिक बीमारी है जिसमें किडनी में कई सिस्ट विकसित हो सकते हैं।
6. किडनी की बीमारी की जांच कैसे होती है?
किडनी की बीमारी की पहचान करने के लिए डॉक्टर व्यक्ति के लक्षण, मेडिकल इतिहास और जांच के परिणामों को देखते हैं।
1. रक्त की जांच
रक्त में Creatinine की जांच किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने में महत्वपूर्ण होती है।
इसके आधार पर eGFR जैसी गणना की जाती है, जिससे किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता का अनुमान लगाया जाता है।
2. यूरिन टेस्ट
मूत्र की जांच से:
- प्रोटीन
- रक्त
- संक्रमण के संकेत
- अन्य असामान्य पदार्थ
का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
3. Urine Albumin-Creatinine Ratio
इसे सामान्यतः UACR कहा जाता है। यह पेशाब में एल्ब्यूमिन की मात्रा का आकलन करने में मदद करता है।
पेशाब में लगातार अधिक एल्ब्यूमिन किडनी के नुकसान का संकेत हो सकता है।
4. अल्ट्रासाउंड
किडनी का अल्ट्रासाउंड किडनी का आकार, संरचना और कुछ प्रकार की रुकावट या पथरी जैसी समस्याओं की जांच में मदद कर सकता है।
5. CT Scan या MRI
कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर अधिक विस्तृत जानकारी के लिए CT या MRI की सलाह दे सकते हैं।
6. किडनी बायोप्सी
कुछ विशेष परिस्थितियों में किडनी के ऊतक का छोटा नमूना लेकर जांच की जाती है। इसे किडनी बायोप्सी कहा जाता है।
यह हर मरीज के लिए आवश्यक नहीं होती।
7. किडनी की बीमारी के चरण
CKD को आमतौर पर eGFR के आधार पर अलग-अलग चरणों में वर्गीकृत किया जाता है।
सामान्य रूप से:
- G1: eGFR 90 या उससे अधिक, लेकिन किडनी डैमेज के अन्य प्रमाण मौजूद हो सकते हैं।
- G2: eGFR 60–89, साथ में किडनी डैमेज का प्रमाण हो सकता है।
- G3a: eGFR 45–59
- G3b: eGFR 30–44
- G4: eGFR 15–29
- G5: eGFR 15 से कम
केवल एक eGFR रिपोर्ट देखकर स्वयं बीमारी का चरण तय नहीं करना चाहिए। CKD का निदान आम तौर पर समय के साथ बने रहने वाले बदलावों और अन्य जांचों को ध्यान में रखकर किया जाता है।
8. किडनी की बीमारी में इलाज कैसे होता है?
इलाज बीमारी के कारण और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है।
8.1 ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करना
उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखना किडनी को आगे होने वाले नुकसान से बचाने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
डॉक्टर जरूरत के अनुसार दवाएं दे सकते हैं।
8.2 डायबिटीज का नियंत्रण
यदि व्यक्ति को डायबिटीज है, तो ब्लड शुगर को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियंत्रित रखना जरूरी है।
कुछ दवाएं किडनी की सुरक्षा में भी भूमिका निभा सकती हैं, लेकिन कौन-सी दवा उपयुक्त है यह व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है।
8.3 भोजन में सावधानी
किडनी की बीमारी में हर व्यक्ति के लिए एक जैसा आहार सही नहीं होता।
कुछ मरीजों को डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार:
- नमक कम करना
- प्रोटीन की मात्रा समायोजित करना
- पोटैशियम नियंत्रित करना
- फॉस्फोरस नियंत्रित करना
- तरल पदार्थ की मात्रा बदलना
पड़ सकता है।
किडनी रोग में बिना सलाह के बहुत अधिक पानी पीना भी हमेशा सही नहीं होता।
8.4 दवाओं की समीक्षा
किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर कुछ दवाओं की खुराक बदलनी पड़ सकती है।
इसलिए डॉक्टर को अपनी सभी दवाओं, सप्लीमेंट और बिना पर्ची मिलने वाली दवाओं के बारे में बताना चाहिए।
9. गंभीर किडनी बीमारी में डायलिसिस
जब किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त तरल पदार्थ पर्याप्त रूप से निकाल नहीं पाती, तो कुछ मरीजों को डायलिसिस की आवश्यकता पड़ सकती है।
मुख्य प्रकार हैं:
हेमोडायलिसिस
इसमें मशीन और एक विशेष फिल्टर की सहायता से खून को साफ किया जाता है।
पेरिटोनियल डायलिसिस
इसमें पेट की अंदरूनी झिल्ली का उपयोग शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालने के लिए किया जाता है।
डायलिसिस कब शुरू करना है, यह केवल किसी एक रक्त जांच के नंबर पर निर्भर नहीं करता। डॉक्टर व्यक्ति के लक्षण, किडनी की कार्यक्षमता और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों को मिलाकर निर्णय लेते हैं।
10. किडनी ट्रांसप्लांट
किडनी की अंतिम अवस्था की बीमारी में कुछ मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट उपचार का विकल्प हो सकता है।
इसमें खराब किडनी की कार्यक्षमता को बदलने के लिए दान की गई किडनी प्रत्यारोपित की जाती है।
ट्रांसप्लांट के बाद शरीर नई किडनी को अस्वीकार न करे, इसके लिए विशेष दवाओं और नियमित चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है।
11. किडनी की बीमारी से बचाव कैसे करें?
हर प्रकार की किडनी बीमारी को पूरी तरह रोकना संभव नहीं होता, लेकिन कई मामलों में जोखिम को कम किया जा सकता है।

1. ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें
नियमित रूप से रक्तचाप की जांच करें और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाएं नियमित रूप से लें।
2. ब्लड शुगर नियंत्रित रखें
डायबिटीज होने पर नियमित जांच और उपचार का पालन करें।
3. नमक का अधिक सेवन न करें
बहुत अधिक नमक रक्तचाप बढ़ाने में योगदान कर सकता है।
4. संतुलित भोजन करें
सब्जियां, फल, साबुत अनाज और उचित मात्रा में प्रोटीन सहित संतुलित भोजन लें। यदि पहले से किडनी की बीमारी है, तो आहार में बदलाव डॉक्टर/डाइटिशियन की सलाह से करें।
5. नियमित शारीरिक गतिविधि करें
नियमित व्यायाम वजन, रक्तचाप और चयापचय स्वास्थ्य को बेहतर रखने में मदद कर सकता है।
6. धूम्रपान से बचें
धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और समग्र हृदय-किडनी स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
7. दर्द निवारक दवाओं का अनावश्यक इस्तेमाल न करें
कुछ painkillers, विशेषकर NSAIDs, कुछ परिस्थितियों में किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इन्हें लंबे समय तक लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
8. पर्याप्त पानी पिएं—लेकिन जरूरत के अनुसार
स्वस्थ व्यक्ति के लिए पर्याप्त तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण है, लेकिन किडनी या हृदय की कुछ बीमारियों में डॉक्टर तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह दे सकते हैं।
इसलिए “जितना ज्यादा पानी, उतना स्वस्थ” हर व्यक्ति पर लागू नहीं होता।
12. डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?
यदि निम्न में से कोई समस्या हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है:
- पेशाब में खून दिखाई देना
- लगातार पैरों या चेहरे पर सूजन
- पेशाब की मात्रा में स्पष्ट बदलाव
- लगातार झागदार पेशाब
- बिना स्पष्ट कारण लगातार कमजोरी
- सांस फूलना
- लगातार मतली या उल्टी
- कमर/बगल में तेज या लगातार दर्द
- ब्लड प्रेशर लगातार बहुत अधिक रहना
- डायबिटीज के साथ किडनी संबंधी लक्षण
तुरंत चिकित्सा सहायता कब लें?
यदि सांस लेने में गंभीर परेशानी, बेहोशी/भ्रम, बहुत कम या बिल्कुल पेशाब न होना, अत्यधिक कमजोरी या अचानक गंभीर स्थिति पैदा हो, तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
13. किडनी को स्वस्थ रखने के लिए रोजमर्रा की आदतें
एक स्वस्थ जीवनशैली किडनी सहित पूरे शरीर के लिए फायदेमंद हो सकती है।
रोजाना:
संतुलित भोजन → नियमित शारीरिक गतिविधि → स्वस्थ वजन → ब्लड प्रेशर नियंत्रण → ब्लड शुगर नियंत्रण → धूम्रपान से दूरी → दवाओं का समझदारी से इस्तेमाल → जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य जांच
इन आदतों को अपनाना उपयोगी हो सकता है।
14. किडनी की बीमारी के बारे में आम गलतफहमियां
गलतफहमी 1: कमर दर्द मतलब किडनी खराब
जरूरी नहीं। कमर दर्द के अनेक कारण हो सकते हैं।
गलतफहमी 2: ज्यादा पानी पीने से हर किडनी बीमारी ठीक हो जाती है
यह सही नहीं है। कुछ किडनी रोगों में तरल पदार्थ की मात्रा सीमित करने की आवश्यकता भी हो सकती है।
गलतफहमी 3: जब तक लक्षण नहीं हैं, किडनी बिल्कुल स्वस्थ है
यह भी सही नहीं है। शुरुआती CKD में अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं होते।
गलतफहमी 4: किडनी की बीमारी होने पर तुरंत डायलिसिस करना पड़ता है
नहीं। डायलिसिस की जरूरत बीमारी की गंभीरता और मरीज की स्थिति पर निर्भर करती है।
15. निष्कर्ष
किडनी हमारे शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण अंग है। किडनी की बीमारी धीरे-धीरे विकसित हो सकती है और शुरुआती चरण में इसके लक्षण बहुत कम या बिल्कुल नहीं दिखाई दे सकते हैं। थकान, शरीर में सूजन, पेशाब में बदलाव, पेशाब में खून, मतली, खुजली, मांसपेशियों में ऐंठन और सांस फूलना जैसे लक्षण कुछ किडनी समस्याओं में दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इनका कारण अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं।
इसलिए केवल इंटरनेट पर पढ़े लक्षणों के आधार पर स्वयं बीमारी का निदान या इलाज नहीं करना चाहिए। यदि आपको लगातार या चिंताजनक लक्षण हैं, अथवा आपको डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी रोग का जोखिम है, तो डॉक्टर से उचित जांच के बारे में बात करें।
महत्वपूर्ण: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किडनी की बीमारी की पुष्टि रक्त, मूत्र और आवश्यकतानुसार अन्य चिकित्सकीय जांचों से होती है। दवा, डाइट या पानी की मात्रा में बड़ा बदलाव डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।
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