diabetes symptoms

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डायबिटीज के लक्षण (diabetes symptoms): शुरुआती संकेत, कारण, प्रकार, जांच और बचाव

diabetes symptoms – आजकल डायबिटीज आम हो गई है और बहुत से लोगों की जिंदगी उससे प्रभावित होती है। इस बीमारी में खून में शक्कर (ब्लड ग्लूकोज) का स्तर बढ़ जाता है। ग्लूकोज तो जरूरी है क्योंकि उससे शरीर को ऊर्जा मिलती है, मगर जब ये शक्कर लगातार ज्यादा बनी रहती है, तो धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों पर असर दिखने लगता है। यहां तक कि रक्त वाहिकाओं में भी परेशानी होने लगती है।

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डायबिटीज की शुरूआत अक्सर बड़े हल्के इशारों से होती है। लोग खुद को थका हुआ मान लेते हैं, या सोचते हैं कि ज्यादा प्यास लगना, बार-बार बाथरूम जाना, ये सब तो रोज़मर्रा की बातें हैं। टाइप-2 डायबिटीज का तो कुछ पता ही नहीं चलता — महीनों, कभी-कभी सालों तक। WHO भी कहता है कि टाइप-2 में लक्षण या तो बहुत कम होते हैं या बिल्कुल नजर नहीं आते। इसी चक्कर में सही वक्त पर बीमारी पकड़ में नहीं आती।

यही वजह है कि थोड़े भी संकेत मिलें, तो उन्हें नजरअंदाज करना ठीक नहीं। अगर बार-बार पेशाब लगता है, बहुत प्यास लगती है, बिना कारण वजन गिर रहा है, हरदम थकान महसूस होती है, धुंधलापन दिखता है या इंफेक्शन बार-बार हो रहा है — तो एक बार ब्लड शुगर जांच जरूर करवा लेनी चाहिए। डॉक्टर से मिलना भी समझदारी रहेगी।

अब बात डायबिटीज के लक्षणों को एक-एक कर समझने की-

1. डायबिटीज आखिर है क्या?

डायबिटीज में समस्या ये होती है कि शरीर अपने खून में मौजूद ग्लूकोज को ठीक से संभाल नहीं पाता। वजहें कई हो सकती हैं — जैसे, शरीर में इंसुलिन कम बन रहा हो या फिर इंसुलिन है, लेकिन वो अपना काम ठीक से नहीं कर पा रहा। कई बार दोनों ही बातें एक साथ हो जाती हैं।

इंसुलिन एक तरह का हार्मोन है, जो ये तय करता है कि खून में मौजूद ग्लूकोज सेल्स तक पहुंचे, ताकि वो ग्लूकोज एनर्जी में बदल सके। जब इंसुलिन ठीक से काम नहीं करता, तो ग्लूकोज हमारे खून में जमा होने लगता है।

अब अगर लंबे वक्त तक शुगर हाई रहे, तो इस चक्कर में दिल, आंखों, किडनी, नसों और ब्लड वेसल्स पर असर पड़ने लगता है।

डायबिटीज के बारे में समझना है तो इसके अहम प्रकार जानना जरूरी है।

टाइप-1 डायबिटीज
इसमें शरीर की इम्यून सिस्टम खुद ही उन कोशिकाओं पर हमला कर देती है, जो इंसुलिन बनाती हैं। नतीजा, इंसुलिन या तो बहुत कम बनता है या बनना पूरी तरह बंद हो जाता है।

अमूमन ये बच्चों और किशोरों में दिखती है, लेकिन वयस्कों को भी हो सकती है।

टाइप-1 के लक्षण कभी-कभी अचानक और तेजी से नजर आते हैं। कई बार हालात हफ्तों में ही खराब हो जाते हैं।

टाइप-2 डायबिटीज
टाइप-2 सबसे आम है। इसमें शरीर इंसुलिन ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता, और वक्त गुजरने के साथ इंसुलिन का बनना भी कम हो जाता है।

इसके लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते हैं। बहुत लोगों को लंबे वक्त तक कोई खास लक्षण नहीं दिखते।

इसीलिए कई बार रूटीन हेल्थ चेकअप में ही यह बीमारी पकड़ में आती है।

2.गर्भावधि डायबिटीज

कुछ महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड शुगर बढ़ने लगती है। इसे गर्भावधि या गेस्टेशनल डायबिटीज कहते हैं।

इसमें भी आम तौर पर कोई साफ लक्षण नहीं मिलते। डॉक्टर की सलाह पर जांच कराना जरूरी है। CDC के मुताबिक, ये जांच आमतौर पर प्रेग्नेंसी के 24 से 28 हफ्तों के बीच करवाई जाती है।

3.डायबिटीज का सबसे पहला संकेत क्या है?

डायबिटीज का कोई एक निशानी नहीं है जिससे कहा जा सके कि आपको ये बीमारी है। फिर भी कुछ संकेत ऐसे होते हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।

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डायबिटीज के कुछ आम लक्षण होते हैं जो शुरुआत में अकसर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। जैसे बार-बार पेशाब आना, बहुत प्यास लगना या हर वक्त भूख लगना। कभी बिना कोशिश के वजन कम होने लगता है, शरीर हमेशा थका-थका सा महसूस करता है, या आंखों के आगे सब कुछ धुंधला दिखने लगता है। घाव जल्दी नहीं भरते, शरीर बार-बार इंफेक्शन पकड़ता रहता है, और हाथ-पैर में भी कई बार झनझनाहट या सुन्नपन आ सकता है। त्वचा में खुजली या फंगल इंफेक्शन भी हो सकता है।

WHO और CDC भी डायबिटीज के सबसे सामान्य लक्षणों में बार-बार पेशाब आना, ज्यादा प्यास और बिना किसी वजह के वजन कम होना जैसी बातें गिनती हैं।

4. बार-बार पेशाब आना

अगर आपको अचानक बार-बार पेशाब आने लगे, तो इसे हल्के में मत लें — ये डायबिटीज का एक खास संकेत हो सकता है। जब ब्लड शुगर बहुत ज्यादा होता है, तो शरीर एक्स्ट्रा शुगर को यूरिन के रास्ते बाहर निकालने लगता है। यही वजह है कि दिन-रात बार-बार वॉशरूम जाना पड़ता है। खास बात यह है कि अगर पेशाब के साथ प्यास भी ज्यादा लग रही है और लगातार थकान बनी हुई है, तो डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं। वैसे, पेशाब बार-बार आने के और भी कारण हो सकते हैं, इसलिए सिर्फ इसी वजह से डायबिटीज मान लेना सही नहीं।

5. बहुत ज्यादा प्यास लगना

पेशाब ज्यादा होने से बॉडी का पानी भी खूब निकलता है, इसलिए प्यास भी बार-बार लगती है। कभी-कभी ऐसा भी लगता है कि गला हर वक्त सूख रहा है या नॉर्मल से ज्यादा पानी पीना पड़ रहा है। जितनी बार आपको दिन में या रात को प्यास लगे और बार-बार पेशाब आए, उतनी ही जल्दी ब्लड शुगर टेस्ट कराने का सोचना चाहिए।

WHO के मुताबिक, ये दोनों लक्षण सबसे आम माने जाते हैं डायबिटीज के लिए।

6. भूख का बढ़ जाना

कई बार डायबिटीज वाले लोगों को हर वक्त भूख लगती है, खाने के बाद भी पेट नहीं भरता। इसकी वजह है कि शरीर शुगर को अच्छी तरह एनर्जी में बदल नहीं पाता, तो बार-बार खाली महसूस होता है। अगर भूख के साथ साथ वजन घट रहा है और प्यास-पेशाब दोनों बहुत ज्यादा हो रहे हैं, तो देरी बिलकुल न करें, डॉक्टर को दिखा लें।

7. बिना कोशिश किए वजन कम होना

खाना-पीना नॉर्मल होने के बावजूद वजन अचानक गिरने लगे तो चौकन्ना हो जाइए। टाइप-1 डायबिटीज में ये बदलाव ज्यादा जल्दी दिखता है। बॉडी जब शुगर इस्तेमाल नहीं कर पाती, तो एनर्जी के लिए फैट और मसल्स से काम चलाती है, जिससे वजन कम होता है। वज़न घटने के और भी कारण हो सकते हैं, मगर खास तौर पर जब कोई लॉजिक न समझ आए तो एक बार जांच कराना ठीक रहता है।

8. लगातार थकान और कमजोरी

डायबिटीज में लोग हर वक्त थका-थका महसूस करते हैं, चाहे रात की नींद अच्छे से पूरी क्यों न हुई हो। हल्के-फुल्के काम करने में भी एनर्जी खत्म लगती है। अगर साथ में प्यास, पेशाब और वजन गिरना भी हो रहा है तो ब्लड शुगर टेस्ट जरूर करा लें। CDC भी थकान को डायबिटीज का आम लक्षण मानता है।

9. धुंधला दिखना

ब्लड शुगर ऊपर-नीचे होने से आंखों पर असर पड़ता है, देखने में धुंधलापन आता है, कभी-कभी सामने सब फॉग जैसा लगता है। धुंधली नजर सिर्फ डायबिटीज में ही नहीं, कई और वजहों से भी हो सकती है, लेकिन अचानक या लगातार ऐसा हो तो डॉक्टर से मिलें। लम्बे समय तक अनकंट्रोल्ड शुगर से आंखों की नसों को नुकसान हो सकता है, जिससे आगे चलकर गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।

10. घाव देर से भरना

डायबिटीज में घाव ठीक होने में वक्त ले सकते हैं, खासकर पैरों में कोई कट-छिलका या फोड़ा-फुंसी हो जाए तो। लंबे समय तक हाई शुगर नसों और ब्लड सर्कुलेशन पर असर डालती है, जिससे घाव भरने में और भी दिक्कत आती है। अगर घाव ठीक नहीं हो रहे या बार-बार इन्फेक्शन हो रहा है, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएं।

11. बार-बार संक्रमण होना

कुछ लोगों को डायबिटीज में बार-बार इन्फेक्शन पकड़ लेता है — स्किन इंफेक्शन, यूरिन इन्फेक्शन या यीस्ट इंफेक्शन खास तौर पर। बार-बार इन्फेक्शन के और भी कारण हो सकते हैं, पर अगर ये लगातार हो रहा हो तो डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

12. हाथ-पैर में झुनझुनी या सुन्नपन

लंबे समय तक शुगर हाई रहने से हाथ-पैर में झनझनाहट, सुन्नपन, कभी जलन, कभी चुभन या सेंसेशन कम लग सकती है। WHO भी मानता है कि डायबिटीज लंबे समय तक रही तो नसों को नुकसान पहुँच सकता है और इससे पैरों की दिक्कतें बढ़ सकती हैं।

13. त्वचा में खुजली और संक्रमण

डायबिटीज में स्किन प्रॉब्लम भी दिख सकती है — बार-बार फंगल इंफेक्शन, किसी हिस्से में खुजली, या खास कर जहां स्किन गीली रहती है वहां पर दिक्कत। लेकिन सिर्फ खुजली देखकर डायबिटीज का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता, उसके और भी कारण हो सकते हैं।

14. महिलाओं में डायबिटीज के संकेत

महिलाओं में भी संकेत ज्यादा अलग नहीं होते। प्यास, पेशाब, थकान, भूख, वजन कम होना, बार-बार इंफेक्शन और धुंधलापन सब वो ही लक्षण हैं। कुछ महिलाओं को बार-बार यीस्ट इंफेक्शन या यूरिन इंफेक्शन हो सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान शुगर बढ़ जाए तो उसे गर्भावधि डायबिटीज कहते हैं — इसमें कई बार साफ लक्षण नहीं दिखते, इसलिए थोड़ा ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है।

15. पुरुषों में डायबिटीज के संकेत

पुरुषों में भी लक्षण मिलते-जुलते ही रहते हैं — बार-बार पेशाब, बहुत प्यास, लगातार कमजोरी, भूख लगना, वज़न कम होना, धुंधला दिखना, घाव ठीक होने में समय लगना, बार-बार इंफेक्शन और हाथ-पैर में झुनझुनी। अगर डायबिटीज देर तक अनकंट्रोल रहे तो नसों और ब्लड सर्कुलेशन पर असर पड़ सकता है। इसलिए वक्त पर टेस्ट करवाना और ट्रीटमेंट जरूरी है।

16. बच्चों में डायबिटीज

टाइप-1 डायबिटीज बच्चों में तेजी से उभर सकती है। अगर बच्चा बार-बार पेशाब करे, रात को बिस्तर गीला करने लगे, जरूरत से ज्यादा पानी मांगे, बहुत भूखा लगे, वज़न तेजी से गिरने लगे, हर वक्त थकावट महसूस हो या बर्ताव में बदलाव आए तो माता-पिता को सतर्क हो जाना चाहिए। कुछ हफ्तों या महीनों में भी अचानक ये लक्षण उभर सकते हैं।

17. बुज़ुर्गों में डायबिटीज

बुजुर्गों में डायबिटीज के लक्षण हमेशा इतने साफ नज़र नहीं आते। थकान, कमजोरी, विजन में बदलाव, बार-बार इन्फेक्शन — ये सब उम्र के साइड इफेक्ट्स लगे तो भी टेस्ट टालना नहीं चाहिए। बढ़ती उम्र में रेगुलर हेल्थ चेकअप बहुत ज़रूरी है।

अगर डॉक्टर सलाह दें तो ब्लड शुगर टेस्ट में देर न करें।

18. डायबिटीज के गंभीर लक्षण

अगर ब्लड शुगर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो तकलीफें गंभीर हो सकती हैं। ऐसे में लापरवाही न बरतें और फौरन इलाज कराएं।

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इनमें शामिल हो सकते हैं:

  • बहुत ज्यादा कमजोरी
  • अत्यधिक प्यास और निर्जलीकरण
  • उल्टी या मतली
  • पेट में दर्द
  • सांस लेने में परेशानी या तेजी से सांस लेना
  • अत्यधिक उनींदापन
  • भ्रम या चेतना में बदलाव

WHO के अनुसार बहुत अधिक ब्लड ग्लूकोज की गंभीर स्थिति में उल्टी, तेजी से सांस लेना, गंभीर निर्जलीकरण और चेतना में बदलाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

ऐसी स्थिति में घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

19. डायबिटीज और डायबिटिक कीटोएसिडोसिस

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस यानी DKA एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति है। यह विशेष रूप से टाइप-1 डायबिटीज में हो सकती है, हालांकि अन्य परिस्थितियों में भी हो सकती है।

इसमें शरीर में इंसुलिन की गंभीर कमी के कारण शरीर ऊर्जा के लिए वसा का अधिक उपयोग करता है और कीटोन बढ़ सकते हैं।

संभावित संकेतों में शामिल हैं:

  • अत्यधिक प्यास
  • बार-बार पेशाब
  • मतली
  • उल्टी
  • पेट दर्द
  • कमजोरी
  • तेज या गहरी सांस
  • भ्रम या अत्यधिक उनींदापन

यदि ऐसे गंभीर लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करना जरूरी है।

20. डायबिटीज के लक्षण कब दिखाई देते हैं?

हर व्यक्ति में डायबिटीज के लक्षण एक जैसे नहीं होते।

टाइप-1 डायबिटीज में लक्षण अपेक्षाकृत तेजी से दिखाई दे सकते हैं।

इसके विपरीत टाइप-2 डायबिटीज में लक्षण कई वर्षों तक बहुत हल्के रह सकते हैं या बिल्कुल स्पष्ट नहीं हो सकते।

इसी कारण किसी व्यक्ति को स्वस्थ महसूस होने के बावजूद ब्लड शुगर बढ़ा हुआ हो सकता है।

21. क्या केवल लक्षणों से डायबिटीज की पहचान हो सकती है?

नहीं।

लक्षण डायबिटीज की संभावना की ओर संकेत कर सकते हैं, लेकिन केवल लक्षणों के आधार पर डायबिटीज की पुष्टि नहीं की जा सकती।

डायबिटीज की पुष्टि के लिए चिकित्सकीय मूल्यांकन और रक्त में ग्लूकोज की जांच की जाती है।

WHO के अनुसार डायबिटीज के निदान में फास्टिंग प्लाज्मा ग्लूकोज, ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट और अन्य रक्त ग्लूकोज मापों का उपयोग किया जाता है।

22. डायबिटीज की जांच कैसे होती है?

डॉक्टर मरीज की उम्र, लक्षण, पुरानी बीमारियां और जोखिम को देखकर टेस्ट सुझाते हैं।

आम तौर पर ये जांचें की जाती हैं:

22.1 फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज
रात भर उपवास के बाद रक्त में ग्लूकोज का स्तर नापा जाता है।

22.2 HbA1c
यह टेस्ट पिछले करीब 2 से 3 महीनों की औसत शर्करा का अंदाजा देता है।

22.3 ओरल ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट
इसमें ग्लूकोज वाला पेय लेने से पहले और बाद में शर्करा का मापन होता है।

कौन सा टेस्ट जरूरी होगा, और रिपोर्ट का मतलब क्या है, यह डॉक्टर मरीज की हालत देखकर तय करते हैं।

23. कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर नीचे दिए गए लक्षण बार बार या लंबे समय तक दिख रहे हों, तो डॉक्टर को दिखाना बेहतर रहता है:

  • बहुत ज्यादा प्यास
  • बार बार पेशाब
  • लगातार थकान
  • बिना वजह वजन घटना
  • धुंधला दिखना
  • बार बार संक्रमण
  • घाव का देर से भरना
  • हाथ या पैर में झुनझुनी

अगर लक्षण तेजी से बढ़ रहे हों, तो देर न करें और तुरंत सलाह लें।

24. डायबिटीज को नजरअंदाज करने से क्या हो सकता है?

कई समय तक शर्करा नियंत्रित न रहे, तो शरीर के अलग अलग हिस्सों में नुकसान हो सकता है।

कुछ संभावित समस्याएं ये हो सकती हैं:

हृदय से जुड़ी परेशानी
डायबिटीज दिल और खून की नलियों को प्रभावित कर सकती है। इससे जोखिम बढ़ता है।

किडनी पर असर
लंबे समय तक ऊंची शर्करा रहने से किडनी की रक्त नलियों को चोट लग सकती है।

आंखों पर असर
डायबिटीज आंखों की नलियों को नुकसान दे सकती है। गंभीर हालत में देखने में कमी हो सकती है।

नसों पर असर
नसों में दिक्कत होने से दर्द, जलन, झुनझुनी या सुन्नपन हो सकता है।

पैरों की समस्या
नसों और रक्त प्रवाह में बदलाव से पैरों में घाव और संक्रमण की आशंका बढ़ती है।

25. क्या डायबिटीज को रोका जा सकता है?

सभी तरह की डायबिटीज को रोकना संभव नहीं होता।

टाइप-1 डायबिटीज के मामले में, आज की तारीख में इसे सामान्य जीवनशैली के जरिए रोके जाने के तरीके सीमित हैं।

26. डायबिटीज से बचाव के लिए स्वस्थ भोजन

अगर आप डायबिटीज से बचना चाहते हैं या चाहे आपको डायबिटीज हो भी गई हो, तो सबसे जरूरी है अपने खाने-पीने का ध्यान रखना। आपके खाने में भरपूर सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, फाइबर वाली चीज़ें, ठीक-ठाक प्रोटीन और फलों की सीमित मात्रा शामिल हो, तो बहुत मदद मिलती है।

मीठे ड्रिंक्स, ज्यादा चीनी और तली-भुनी या पैकेट वाली चीजों से जितना बचें, उतना बेहतर रहेगा।

अब हर किसी की सेहत, वजन और उनकी दवाओं के हिसाब से डाइट थोड़ी अलग हो सकती है। इसलिए अपने लिए सही डाइट प्लान के लिए डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना ही अच्छा है।

27. नियमित व्यायाम क्यों जरूरी है?

फिट रहना सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, असल में सेहत के लिए जरूरी है। रोज थोड़ा चलना-फिरना, दौड़ना या जो भी आपको पसंद हो, वो करना वजन को काबू में रखता है और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा भी घटाता है।

WHO भी यही सलाह देता है कि एक्टिव रहें, बैठे-बैठे न रहें।

अगर पहले से कोई बीमारी है, तो नए एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर से जरूर पूछ लें।

28. वजन को नियंत्रित रखना

ज्यादा वजन, खासकर पेट के आसपास जमी चर्बी, टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा देती है। इसलिए हेल्दी खाने के साथ थोड़ी-बहुत शारीरिक मेहनत और ठीक-ठाक वजन बनाए रखना जरूरी है।

हर किसी का वजन कम करने का तरीका उसी की उम्र और सेहत के हिसाब से अलग होना चाहिए। फटाफट वजन घटाने वाले शॉर्टकट से बचें, वरना नुकसान भी हो सकता है।

29. धूम्रपान और तंबाकू से बचें

तंबाकू और सिगरेट सेहत के हर लिहाज़ से नुकसानदेह हैं। WHO भी कहता है, इनसे दूर रहें तो डायबिटीज और दिल के रोग दोनों का खतरा घटता है।

अगर तंबाकू छोड़ना मुश्किल लगता है, तो डॉक्टर या किसी एक्सपर्ट से मदद लें।

30. क्या डायबिटीज हमेशा लक्षण देती है?

नहीं, बिलकुल भी नहीं।

यही सबसे बड़ी परेशानी है। खासकर टाइप-2 डायबिटीज में, अक्सर सालों तक कोई खास लक्षण भी नहीं दिखते।

इसलिए सिर्फ ‘मुझे कोई दिक्कत नहीं लग रही, तो सब ठीक है’ सोच लेना सही नहीं है। अगर आपको खतरा है, तो समय-समय पर ब्लड शुगर चेक कराना जरूरी है।

31. डायबिटीज के लक्षण – एक नजर में

यहाँ डायबिटीज के कुछ आम लक्षण दिए गए हैं:

  •  पेशाब बार-बार आना
  •  हमेशा प्यास लगना
  •  जल्दी-जल्दी भूख लगना
  •  बिना मेहनत वजन कम होना
  •  हर समय थकान रहना
  •  आँखों के सामने धुंधलापन
  •  घाव या चोट का धीरे-धीरे भरना
  •  बार-बार इन्फेक्शन होना
  • हाथ-पैर सुन्न या झनझनाना
  •  स्किन पर खुजली या बार-बार रैशेज

32. डायबिटीज के लक्षणों को कब गंभीर मानें?

अगर सिर्फ हल्की थकान है, तो हो सकता है और भी कोई वजह हो। लेकिन कई लक्षण एक साथ दिखें – जैसे ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब, वजन कम होना, कमजोरी – तो डॉक्टर से शुगर चेक करवानी चाहिए।

अगर इसके साथ उल्टी, पेट दर्द, तेज सांस, भारी कमजोरी, उलझन या बेहोशी जैसा कुछ हो, तो फौरन डॉक्टर के पास जाएं – यह इमरजेंसी हो सकती है।

33. घर पर ब्लड शुगर जांच

कई लोग घर पर ग्लूकोमीटर से शुगर नापते हैं, यह अच्छा है। लेकिन सिर्फ एक बार की रीडिंग से डायबिटीज का फैसला न करें।

अगर कई बार शुगर लिमिट से ज्यादा आ रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करें और जरूरी टेस्ट करवाएं।

34. डायबिटीज हो जाए तो क्या करें?

अगर जांच में डायबिटीज पक्का हो गई है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सही इलाज और दिनचर्या के साथ इसे संभाला जा सकता है।

डॉक्टर आपकी हालत देखकर:

  •  खाने-पीने की सलाह देंगे
  •  एक्सरसाइज बताएंगे
  •  ब्लड शुगर मॉनिटरिंग, दवाएं या इंसुलिन देंगे
  •  रेगुलर चेकअप कराएंगे

टाइप-1 वालों को इंसुलिन जरूरी रहती है। टाइप-2 में इलाज व्यक्ति के हिसाब से बदल सकता है।

35. खुद से दवा शुरू करना क्यों गलत है?

सिर्फ लक्षण देखकर शुगर की दवा नहीं लेनी चाहिए। हर किसी की वजह और इलाज अलग होता है। किसी और की दवा खुद पर न आज़माएँ, नुकसान हो सकता है।

दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लें।

36. डायबिटीज से जुड़ी आम ग़लतफ़हमियाँ

  •  सिर्फ मीठा खाने से डायबिटीज होती है? – नहीं! सिर्फ इतना ही नहीं, इसमें जेनेटिक्स, उम्र, वजन, एक्टिविटी जैसे बहुत सारी बातें जुड़ी होती हैं।
  • दुबले लोगों को डायबिटीज नहीं होती? – ये भी गलत है। पतले-पतले लोग भी डायबिटीज के शिकार बन सकते हैं।
  •  लक्षण नहीं, तो डायबिटीज नहीं है? – ये सोच भी गलत है। खास टाइप-2 में कई बार लक्षण ही नहीं दिखते।
  •  डायबिटीज में फल बिल्कुल नहीं खाना चाहिए? – जरूरी नहीं। फल की मात्रा और टाइप डाइट प्लान के हिसाब से तय करें।

37. डायबिटीज और हेल्दी लाइफस्टाइल

डायबिटीज से बचने और इसे संभालने में अच्छा लाइफस्टाइल बहुत मदद करता है। इसके लिए:

  •  संतुलित खाना खाएं
  •  रोज थोड़ा-बहुत व्यायाम करें
  •  नींद पूरी लें
  •  वजन कंट्रोल में रखें
  •  तंबाकू, सिगरेट से दूर रहें
  •  डॉक्टर की सलाह मानें और जरूरी टेस्ट कराएं
  •  दवाएं रेगुलर लें
  •  पैरों और स्किन की ठीक से देखभाल करें

38. डायबिटीज में पैरों की केयर क्यों?

डायबिटीज वालों को रोज़ पैरों की हालचाल ज़रूर देखनी चाहिए। जरा सा भी कट, छाला, घाव, सूजन या लालिमा नजर आए, तो डॉक्टर से पूछें।

अगर पैरों का घाव जल्दी नहीं भर रहा है, इंफेक्शन दिख रहा है, या अंगों में सुन्नपन या संवेदना कम महसूस हो रही है, तो देरी न करें डॉक्टर से मिलिए। डायबिटीज, नसों और पैरों के ब्लड फ्लो को कमजोर कर सकती है जिससे बड़ी दिक्कत हो सकती है।

39. आंखों की निगरानी क्यों जरूरी है?

डायबिटीज आंखों पर असर डाल सकती है। इसलिए आंखों की रेगुलर जांच करवाना ठीक रहता है, खास डायबिटीज वालों के लिए।

अगर अचानक दृष्टि में बदलाव, कम दिखना या कोई और दिक्कत हो, तो डॉक्टर के पास जाना टालिए मत।

40. निष्कर्ष

डायबिटीज ऐसी बीमारी है जिसके शुरूआती लक्षण अक्सर छूट जाते हैं। बार-बार पेशाब आना, खूब प्यास लगना, भूख बढ़ना, बिना वजह वजन गिरना, लगातार थकान, धुंधली नजर, बार-बार इंफेक्शन या घाव जल्दी न भरना – ये सब इसके संकेत हैं।

टाइप-1 डायबिटीज के लक्षण जल्दी आ सकते हैं, जबकि टाइप-2 में बहुत धीरे-धीरे या बिना लक्षण के भी चलता रह सकता है।

सिर्फ लक्षण देखकर भरोसा न करें। असली स्थिति जानने के लिए ब्लड शुगर जांच करवाएं और डॉक्टर से सलाह लें।

अगर लगातार तेज प्यास, बार-बार पेशाब, वजन कम होना या थकान जैसी दिक्कतें दिखें, तो तुरंत जांच कराएं। और अगर भारी कमजोरी, उल्टी, पेट दर्द, तेज सांस, उलझन या बेहोशी जैसा कुछ लगे, तो बिना देर किए इलाज लें।

याद रखें, डायबिटीज वक्त पर पकड़ में आ जाए, टेस्ट सही से हो, डॉक्टर की सलाह मानी जाए और लाइफस्टाइल हेल्दी रहे – तो बीमारी को नियंत्रण में रख सकते हैं और कई जटिलताओं से बच सकते हैं।

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